तभी खोलेगी दरवाज़ा मुहब्बत अना से बोल कुंडी खटखटाए
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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फिर एक रोज़ मुक़द्दर से हार मानी गई ज़बीन चूम के बोला गया "ख़ुदा हाफ़िज़"
Afkar Alvi
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मुस्तक़िल बोलता ही रहता हूँ कितना ख़ामोश हूँ मैं अंदर से
Jaun Elia
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ख़ामोशी में आवाज़ का किरदार कोई है जो बोलता रहता है लगातार, कोई है
Shakeel Gwaliari
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तुम मुहब्बत से नहीं मुझ सेे ख़फ़ा हो शायद तुम अगर चाहो तो पिंजरा भी बदल सकते हो मुंतज़िर हूँ मैं सो नंबर भी नहीं बदलूँगा और तुम शहर का नक़्शा भी बदल सकते हो
Vikram Sharma
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ज़रा सी देर उठने में हुई क्या लगे सब पाँव दक्षिण ओर करने
Atul K Rai
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नदी उस पार के साथी अकेले रो रहे होंगे निकल लेते हैं चल भाई अभी सब सो रहे होंगे बिछड़ने के दुखों पर ये ख़ुशी मरहम लगाएगी जो पागल कह रहे थे अब वो पागल हो रहे होंगे
Atul K Rai
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चलेंगे आख़िरी तक साथ कहते हैं बहुत लेकिन बहुत कम लोग हैं जो आख़िरी तक साथ चलते हैं
Atul K Rai
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ज़िन्दाबाद करो उस आशिक़ का जो ज़ंजीरों में भी हँस कर बोल रहा पायल की छम छम ज़िन्दाबाद रहे
Atul K Rai
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हमारी ख़्वाहिश है पेड़ जिस को लगाया तुम ने हरा रहे बस वगरना कोई भी घाव ऐसा नहीं है जिस की दवा नहीं है
Atul K Rai
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