ये उस के उन्स में जलते दीयों की रौशनी, इस को बढ़ा गर वो नहीं सकता बुझा मैं भी नहीं सकता
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तस्वीर इक जला के बुझाता रहा हूँ मैं उस के ही पास लौट के जाता रहा हूँ मैं ये ना-तमाम ख़्वाब हक़ीक़त हों किस तरह हर पल तो अपनी नींद उड़ाता रहा हूँ मैं
Hasan Raqim
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न हाथ आगे करूँँ सामने सिवाए तेरे न इतना देना कि मुझ को ग़ुरूर आ जाए
Hasan Raqim
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मेरी आँखों में बनकर ख़्वाब मुझ को आज़माती हैं तेरी यादें अभी तक रातों की नींदें उड़ाती हैं वो जिन अलमारियों में मैं तुम्हारी यादें रखता था उन्हीं अलमारियों में अब किताबें धूल खाती हैं
Hasan Raqim
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किसी की मंज़िलों का अक्स बनके भी तो देख किसी को रास्ता होकर गुज़र भी जाने दे
Hasan Raqim
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तुझे खो कर ये अंदाज़ा हुआ मैं तेरे साए का पीछा कर रहा था
Hasan Raqim
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